इस कविता 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' में निदा फ़ाज़ली मानवता की संवेदनाओं की कमी पर सवाल उठाते हैं, जिसमें लोग एक-दूसरे के दर्द से अज्ञेय होते जा रहे हैं। इस पाठ के माध्यम से संवेदनशीलता और सहानुभूति को पुनर्जीवित करने का आवाहन किया गया है।
Author: निदा फ़ाज़ली
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कविता 'अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले' में निदा फ़ाज़ली मानवता की संवेदनाओं के बारे में चर्चा करते हैं। इसे क्लास 10 हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
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