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Curriculum-aligned learning paths for students in Classes 6-12.

CBSE
Class 10
Hindi
Sparsh
मैथिलीशरण गुप्त – मानुषीता

Revision Guide

Practice Hub

Revision Guide: मैथिलीशरण गुप्त – मानुषीता

इस पाठ में मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएँ और उनकी लेखनी पर चर्चा की गई है। यह हिन्दी साहित्य में गुप्त जी की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है।

Structured practice

मैथिलीशरण गुप्त – मानुषीता - Quick Look Revision Guide

Your 1-page summary of the most exam-relevant takeaways from Sparsh.

This compact guide covers 20 must-know concepts from मैथिलीशरण गुप्त – मानुषीता aligned with Class X preparation for Hindi. Ideal for last-minute revision or daily review.

Revision Guide

Revision guide

Complete study summary

Essential formulas, key terms, and important concepts for quick reference and revision.

Key Points

1

मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय।

मैथिलीशरण गुप्त 1886 में उत्तर प्रदेश के झाँसी के पास चिरगाँव में पैदा हुए। वे राष्ट्रकवि के रूप में प्रसिद्ध हुए और उनकी शिक्षा घर पर ही हुई। उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, मराठी और अंग्रेजी भाषाओं पर अधिकार रखा।

2

गुप्त जी की प्रमुख रचनाएँ।

गुप्त जी की प्रमुख रचनाओं में 'साकेत', 'यशोधरा', 'जयद्रथ वध' शामिल हैं। इन रचनाओं में उन्होंने भारतीय इतिहास और संस्कृति को दर्शाया।

3

मानुषीता कविता का मूल भाव।

इस कविता में गुप्त जी ने मनुष्यता के उच्च आदर्शों को प्रस्तुत किया है, जहाँ मनुष्य दूसरों के लिए जीता और मरता है।

4

मनुष्य और पशु में अंतर।

कवि के अनुसार, मनुष्य और पशु का मुख्य अंतर यह है कि मनुष्य दूसरों के लिए जीता है, जबकि पशु केवल अपने लिए।

5

सच्ची मनुष्यता की परिभाषा।

सच्ची मनुष्यता वह है जहाँ व्यक्ति दूसरों के हित के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दे।

6

लोक कल्याण की भावना।

गुप्त जी की कविता में लोक कल्याण की भावना प्रबल है, जहाँ मनुष्य समाज के उत्थान के लिए कार्य करता है।

7

दान और त्याग का महत्व।

कविता में दान और त्याग को मनुष्यता का महत्वपूर्ण गुण बताया गया है, जैसे दधीचि ने अपनी हड्डियाँ दान में दीं।

8

अहंकार से मुक्ति का संदेश।

गुप्त जी ने अहंकार से मुक्त होकर जीवन जीने का संदेश दिया है, जो मनुष्यता का आधार है।

9

मृत्यु से न डरने की सीख।

कविता में मृत्यु से न डरने और सच्चे कर्मों द्वारा अमर होने की सीख दी गई है।

10

सामूहिक कल्याण की भावना।

गुप्त जी ने सामूहिक कल्याण की भावना को प्रोत्साहित किया, जहाँ सभी मिलकर समाज का उत्थान करें।

11

ईश्वर और मनुष्य का संबंध।

कविता में ईश्वर और मनुष्य के बीच के संबंध को दर्शाया गया है, जहाँ मनुष्य ईश्वर की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दे।

12

सच्ची मनुष्यता के उदाहरण।

कविता में दधीचि, कर्ण जैसे पात्रों के माध्यम से सच्ची मनुष्यता के उदाहरण प्रस्तुत किए गए हैं।

13

आत्मकेंद्रितता का त्याग।

गुप्त जी ने आत्मकेंद्रितता का त्याग कर समाज के लिए जीने का संदेश दिया है।

14

मनुष्यता का वास्तविक अर्थ।

मनुष्यता का वास्तविक अर्थ है दूसरों के लिए जीना और उनकी सेवा करना।

15

कविता की भाषा शैली।

गुप्त जी की कविता की भाषा शैली सरल और प्रभावी है, जो संस्कृत के शब्दों से युक्त है।

16

मनुष्यता की कसौटी।

कविता के अनुसार, मनुष्यता की कसौटी है दूसरों के लिए त्याग और बलिदान की भावना।

17

समाज सेवा का महत्व।

गुप्त जी ने समाज सेवा को मनुष्य का परम कर्तव्य बताया है।

18

मनुष्यता और अमरत्व।

कविता में बताया गया है कि सच्ची मनुष्यता द्वारा ही मनुष्य अमर हो सकता है।

19

कविता का नैतिक संदेश।

कविता का नैतिक संदेश है कि मनुष्य को निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा करनी चाहिए।

20

मनुष्यता का दर्शन।

गुप्त जी की कविता मनुष्यता के दर्शन को प्रस्तुत करती है, जहाँ मनुष्य दूसरों के लिए जीता है।

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Chapters related to "मैथिलीशरण गुप्त – मानुषीता"

कबीर – साखी

इस अध्याय में कबीरदास की साखियाँ प्रस्तुत की गई हैं, जो ज्ञान, सच्चाई और मानवता के मूल्यों पर जोर देती हैं। इनका अध्ययन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है।

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मीरा – पद

यह अध्याय मीरा के प्रेरणादायक जीवन और उनके भक्ति भाव को दर्शाता है। यह अध्याय हमारी संस्कृति और साधना के महत्व को समझने में मदद करता है।

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सुमित्रानंदन पंत – परवत प्रदेश के पावस

यह अध्याय प्राकृतिक सुंदरता और पर्वतीय प्रदेश की वर्षाकालीन छवि को प्रस्तुत करता है, जो सुमित्रानंदन पंत की काव्यात्मकता को उजागर करता है।

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वीरेन डंगवाल – तोप

यह अध्याय वीरेंद्र डंगवाल की कविता 'तोप' का अध्ययन करता है जो संघर्ष और विद्रोह की भावना को व्यक्त करती है। यह कविता सामाजिक अन्याय के प्रति एक शक्तिशाली बयान है।

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कैफ़ी आज़मी – कर चले हम फ़िदा

यह अध्याय प्रसिद्ध कवि कैफ़ी आज़मी की कविताओं पर केंद्रित है, जो स्वतंत्रता, संघर्ष और मानवता की भावना को व्यक्त करती हैं।

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वींद्रनाथ ठाकुर – आत्मत्राण

यह अध्याय वींद्रनाथ ठाकुर के आत्मत्राण पर केंद्रित है, जिसमें उनके जीवन और शिक्षाओं का उल्लेख किया गया है। यह अध्याय आत्म-निर्भरता और संघर्ष की प्रेरणा देता है।

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इस अध्याय में प्रेमचंद ने बड़े भाई साहब की कहानी के माध्यम से भाईचारे, आत्मीयता और संघर्ष की अहमियत को बयां किया है। यह कहानी सामाजिक और पारिवारिक संबंधों की जटिलताओं को उजागर करती है।

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सीताराम सेकसरिया – डायरी का एक पन्ना

यह अध्याय सीताराम सेकसरिया की डायरी के एक पन्ने पर आधारित है, जो उनके जीवन और विचारों का परिचायक है। यह भारतीय समाज की सोच और संस्कृति को समझने में मदद करता है।

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तताँरा वामीरो कथा

यह कथा अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह के प्रेम और संघर्ष की कहानी है। इसका मुख्य संदेश सच्चे प्रेम की ताकत और सामाजिक बंधनों का विरोध है।

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प्रह्लाद अग्रवाल – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

यह अध्याय प्रह्लाद अग्रवाल और उनके योगदान के बारे में है, जो तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र की विशेषताओं को उजागर करता है। यह अध्याय भारतीय साहित्य की समृद्धि को दर्शाता है।

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मैथिलीशरण गुप्त – मानुषीता Summary, Important Questions & Solutions | All Subjects

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