मीरा – पद is a chapter in the CBSE Class 10 Hindi syllabus from Sparsh. This chapter hub brings together revision notes, practice questions, worksheets, flashcards to help students learn, practice, and revise मीरा – पद effectively.

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मीरा – पद

NCERT Class 10 Hindi Chapter 2: मीरा – पद (Pages 8–12)

Summary of मीरा – पद

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मीरा – पद at a Glance

Board

CBSE

Class

Class 10

Subject

Hindi

Book

Sparsh

Chapter

2

Pages

812

Resources

6 study resources

मीरा – पद Summary

अध्याय में मीरा बाई की जीवन यात्रा और उनके भक्ति अनुभवों का उल्लेख किया गया है। मीरा का जन्म एक राज परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पित करने का निर्णय लिया। उन्हें कृष्ण भक्ति का विशेष प्रेम था। मीरा की भक्ति कविताएं उनकी गहरी श्रद्धा और आस्था को प्रकट करती हैं। इस अध्याय में उनके जीवन की चुनौतियों का भी वर्णन है, जैसे कि समाज की आलोचनाएं और उनके पति से संबंध। मीरा ने कभी हार नहीं मानी और अपनी भक्ति को निरंतर बनाए रखा। उनकी कविताओं में प्रेम, समर्पण, और विधवा होने के बावजूद जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने का संदेश शामिल है। मीरा का चरित्र एक संघर्षशील लेकिन आत्मविश्वासी महिला का है, जो अपने विश्वास के लिए समाज से लड़ती हैं। अध्याय में उनकी भक्ति कविताओं के माध्यम से यह बताया गया है कि कैसे भक्ति आदमी को आत्मिक शांति और संतोष प्रदान करती है। मीरा का जीवन हमें यह सिखाता है कि संकल्प और भक्ति से कोई भी कठिनाई पार की जा सकती है। यह अध्याय न केवल हमारे धार्मिक अंतर्दृष्टि को समृद्ध करता है, बल्कि हमें प्रेरित भी करता है कि हम भी अपने उद्देश्य के प्रति समर्पित रहें। मीरा का जीवन और उनकी कविताएं आज भी अनगिनत लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

मीरा – पद Revision Guide

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Key Points

1

मीराबाई का जन्म और जीवन परिचय।

मीराबाई का जन्म 1503 में राजस्थान के मेड़ता में हुआ। उनका विवाह महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ। उनका जीवन दुखों से भरा रहा और अंततः उन्होंने सांसारिक जीवन त्याग दिया।

2

मीरा की भक्ति भावना।

मीरा की भक्ति दास्य और माधुर्य भाव की थी। उन्होंने कृष्ण को अपना सर्वस्व माना और उनके प्रति पूर्ण समर्पण दिखाया।

3

मीरा के पदों की भाषा शैली।

मीरा के पदों में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती भाषाओं का मिश्रण है। उनकी भाषा सरल और हृदयस्पर्शी है।

4

मीरा के पदों का साहित्यिक महत्व।

मीरा के पद भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं। इनमें भक्ति और प्रेम की गहरी अभिव्यक्ति है।

5

मीरा की कृष्ण भक्ति।

मीरा ने कृष्ण को अपना सब कुछ माना। उनके पदों में कृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति झलकती है।

6

मीरा के पदों में प्रयुक्त अलंकार।

मीरा के पदों में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है।

7

मीरा के पदों की संगीतात्मकता।

मीरा के पद संगीतमय हैं और इन्हें गाया जा सकता है। इनमें लय और ताल का सुंदर समन्वय है।

8

मीरा की सामाजिक चुनौतियाँ।

मीरा को समाज और परिवार की ओर से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी भक्ति पथ पर दृढ़ रहीं।

9

मीरा के पदों में नारी विमर्श।

मीरा के पदों में नारी की स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता की अभिव्यक्ति है। वे नारी शक्ति की प्रतीक हैं।

10

मीरा की रचनाओं का प्रसार।

मीरा के पद पूरे उत्तर भारत में प्रसिद्ध हैं और इन्हें गुजरात, बिहार और बंगाल में भी गाया जाता है।

11

मीरा के पदों में प्रकृति चित्रण।

मीरा के पदों में प्रकृति का सुंदर चित्रण है। उन्होंने प्रकृति के माध्यम से कृष्ण की भक्ति को व्यक्त किया है।

12

मीरा की भाषा में विविधता।

मीरा ने अपने पदों में विभिन्न भाषाओं और बोलियों का प्रयोग किया है, जो उनकी साहित्यिक सृजनशीलता को दर्शाता है।

13

मीरा के पदों में दर्शन।

मीरा के पदों में वेदांत और भक्ति दर्शन की झलक मिलती है। उन्होंने जीवन और ईश्वर के प्रति गहन चिंतन किया है।

14

मीरा की काव्य शैली।

मीरा की काव्य शैली सहज और मार्मिक है। उनके पदों में भावनाओं की गहराई और सरलता है।

15

मीरा के पदों का सामाजिक प्रभाव।

मीरा के पदों ने समाज में भक्ति आंदोलन को बढ़ावा दिया और लोगों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित किया।

16

मीरा की अन्य रचनाएँ।

मीरा की कुल सात-आठ रचनाएँ उपलब्ध हैं, जिनमें उनकी भक्ति और दर्शन की अभिव्यक्ति है।

17

मीरा के पदों में आध्यात्मिकता।

मीरा के पदों में गहरी आध्यात्मिकता है। उन्होंने ईश्वर प्राप्ति के लिए भक्ति को सर्वोत्तम मार्ग बताया।

18

मीरा की भक्ति का स्वरूप।

मीरा की भक्ति व्यक्तिगत और अनन्य थी। उन्होंने कृष्ण को अपना सब कुछ माना और उनके प्रति पूर्ण समर्पण दिखाया।

19

मीरा के पदों में प्रेम की अभिव्यक्ति।

मीरा के पदों में प्रेम की गहरी और मार्मिक अभिव्यक्ति है। उन्होंने कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को बड़ी सहजता से व्यक्त किया है।

20

मीरा की विरह भावना।

मीरा के पदों में विरह की तीव्र अनुभूति है। उन्होंने कृष्ण के वियोग में अपनी पीड़ा को बड़ी संवेदनशीलता से व्यक्त किया है।

मीरा – पद Practice Questions & Answers

Practice important questions and exam-style problems from मीरा – पद. These questions cover key topics from the CBSE Class 10 Hindi syllabus.

How to practice: Start with the questions below to test your understanding of मीरा – पद. Use the revision guide to review concepts you find difficult, then come back and retry the questions for better retention.

View all 123 मीरा – पद questions
Q9

मीरा के जीवन में महान संत किस संत का प्रभाव था?

Single Answer MCQ
Q-00012424
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Q10

मीरा के जीवन में संघर्ष का एक मुख्य कारण क्या था?

Single Answer MCQ
Q-00012425
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Q11

मीरा का भगवान के प्रति समर्पण किस प्रकार की प्रेम भावना दर्शाता है?

Single Answer MCQ
Q-00012426
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Q12

मीरा के कौन से शिष्य थे?

Single Answer MCQ
Q-00012427
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Q13

मीरा के अनुयायियों की संख्या किस प्रकार की थी?

Single Answer MCQ
Q-00012428
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Q14

मीरा की भक्तिभावना ने किस चीज को मजबूत किया?

Single Answer MCQ
Q-00012429
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Q15

मीरा ने किन आंदोलनों में भाग लिया?

Single Answer MCQ
Q-00012430
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Q16

मीरा के पदों में कौन सी बहुचर्चित भावना व्यक्त की गई है?

Single Answer MCQ
Q-00012431
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Q17

मीरा ने किस भगवान का अपने पदों में बार-बार जिक्र किया है?

Single Answer MCQ
Q-00012432
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Q18

मीरा के किस पद में उन्होंने अपने दर्द और भक्ति की अभिव्यक्ति की है?

Single Answer MCQ
Q-00012433
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Q19

मीरा के पदों की रचनात्मक शैली कौन सी है?

Single Answer MCQ
Q-00012434
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Q20

मीरा के पदों में किस तत्व का विशेष महत्व है?

Single Answer MCQ
Q-00012435
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Q21

मीरा का जन्म कहाँ हुआ था?

Single Answer MCQ
Q-00012436
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Q22

मीरा ने किसके द्वारा दिए गए सन्देश को अपनी रचनाओं में शामिल किया है?

Single Answer MCQ
Q-00012437
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Q23

मीरा ने अपने किस पद में कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त किया है?

Single Answer MCQ
Q-00012438
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Q24

मीरा की रचनाओं का प्रमुख विषय कौन सा है?

Single Answer MCQ
Q-00012439
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Q25

मीरा के किस पद में उनके सामाजिक स्थिति पर विचार किया गया है?

Single Answer MCQ
Q-00012440
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Q26

मीरा ने किसका अनुसरण करते हुए अपने पदों में भगवान की आराधना की?

Single Answer MCQ
Q-00012441
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Q27

मीरा की रचनाओं में प्रस्तुत जोखिम के उदाहरण क्या हैं?

Single Answer MCQ
Q-00012442
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Q28

मीरा के पदों में कौन सी विशेषता को प्रमुखता दी गई है?

Single Answer MCQ
Q-00012443
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Q29

मीरा के पदों में सामान्यतः कौन सा प्रतीकात्मक अर्थ प्रकट होता है?

Single Answer MCQ
Q-00012444
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Q30

मीरा की काव्य शैली का मुख्य विषय क्या है?

Single Answer MCQ
Q-00012445
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Q31

मीरा के कौन से पद संतूर की तान की तरह होते हैं?

Single Answer MCQ
Q-00012446
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Q32

मीरा की कविताओं में किसका प्रतिनिधित्व होता है?

Single Answer MCQ
Q-00012447
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Q33

मीरा की कविताओं में प्रयुक्त भाषा किस प्रकार की होती है?

Single Answer MCQ
Q-00012448
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Q34

मीरा की रचनाओं में प्रेम और भक्ति का जो रूप दिखाया गया है, वह किस भाव को दर्शाता है?

Single Answer MCQ
Q-00012449
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Q35

मीरा की कविताओं में संगीत के तत्व किस रूप में होते हैं?

Single Answer MCQ
Q-00012450
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Q36

मीरा के पदों में कौन सा भाव विशेष रूप से प्रकट होता है?

Single Answer MCQ
Q-00012451
View explanation
Q37

मीरा के काव्य में किस प्रकार की प्रतीकात्मकता देखने को मिलती है?

Single Answer MCQ
Q-00012452
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Q38

मीरा के पदों में आवृत्ति के साथ कौन से शब्दों का प्रयोग होता है?

Single Answer MCQ
Q-00012453
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Q39

मीरा के काव्य की विशेषता उनमें किस प्रकार की छवियों की उपस्थिति है?

Single Answer MCQ
Q-00012454
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Q40

मीरा द्वारा कौन सी रचना प्रसिद्ध पद के रूप में जानी जाती है?

Single Answer MCQ
Q-00012455
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Q41

मीरा की काव्य भाषा में किसकी विशेष पहचान होती है?

Single Answer MCQ
Q-00012456
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Q42

मीरा की काव्य शैली में कौन सा तत्व निहित है?

Single Answer MCQ
Q-00012457
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Q43

मीरा को किस भक्त कवि की परंपरा का प्रतिनिधि माना जाता है?

Single Answer MCQ
Q-00012458
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Q44

मीरा के पदों में किस भाव की प्रधानता रहती है?

Single Answer MCQ
Q-00037747
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Q45

मीरा बाई ने अपने पदों में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग किया है?

Single Answer MCQ
Q-00037749
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Q46

मीरा बाई के पदों में कौन सी विशेषता मिलती है?

Single Answer MCQ
Q-00037751
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Q47

मीरा बाई के किस पद में उन्होंने अपनी उपासना के लिए राधा का गुणगान किया है?

Single Answer MCQ
Q-00037753
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Q48

मीरा बाई का जीवन किस प्रकार का रहा है?

Single Answer MCQ
Q-00037755
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Q49

मीरा की कविताओं में किस मौसम का विशेष उल्लेख किया जाता है?

Single Answer MCQ
Q-00037757
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Q50

मीरा बाई के किस पद में उन्होंने प्रेम का दर्द व्यक्त किया है?

Single Answer MCQ
Q-00037759
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Q51

मीरा बाई ने किस साधना की दीक्षा ली थी?

Single Answer MCQ
Q-00037761
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Q52

मीरा बाई ने किस के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की थी?

Single Answer MCQ
Q-00037763
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Q53

मीरा बाई का जन्म किस राज्य में हुआ था?

Single Answer MCQ
Q-00037765
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Q54

मीरा बाई की कविताओं में दिखाई देने वाला मुख्य प्रतीक क्या है?

Single Answer MCQ
Q-00037767
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Q55

मीरा के कविताओं में आमतौर पर किस प्रकार की छवि दर्शाई जाती है?

Single Answer MCQ
Q-00037769
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Q56

मीरा बाई के पदों में किस तत्व का प्रमुख उपयोग होता है?

Single Answer MCQ
Q-00037771
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Q57

मीरा बाई की कविताओं का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Single Answer MCQ
Q-00037773
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Q58

मीरा की भक्ति भावना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Single Answer MCQ
Q-00037775
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Q59

मीरा को अपने भक्ति भाव के लिए कौन-सी आध्यात्मिक परंपरा प्रेरित करती थी?

Single Answer MCQ
Q-00037776
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Q60

मीरा की भक्ति कविता में किस प्रकार की भाषा का प्रयोग होता है?

Single Answer MCQ
Q-00037777
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Q61

मीरा का किस भगवान के प्रति विशेष प्रेम था?

Single Answer MCQ
Q-00037778
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Q62

मीरा ने अपनी भक्ति कविताओं में किस विषय का वर्णन किया है?

Single Answer MCQ
Q-00037779
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Q63

मीरा की भक्ति भावना को सामाजिक परिप्रेक्ष्य में किस प्रकार देखा जाता है?

Single Answer MCQ
Q-00037780
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Q64

मीरा के भक्ति पदों में किस प्रकार की भावनाएं व्यक्त होती हैं?

Single Answer MCQ
Q-00037781
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Q65

मीरा की रचनाएं मुख्यतः किस प्रकार की होती हैं?

Single Answer MCQ
Q-00037782
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Q66

मीरा का किस प्रकार का जीवन था?

Single Answer MCQ
Q-00037783
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Q67

मीरा की भक्ति बाबाजी के प्रति उनके दृष्टिकोण को क्या माना जाता है?

Single Answer MCQ
Q-00037784
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Q68

मीरा के समय में महिलाओं की स्थिति क्या थी?

Single Answer MCQ
Q-00037785
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Q69

मीरा कौन-सी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ खड़ी हुईं?

Single Answer MCQ
Q-00037786
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Q70

मीरा के पदों में दिखाए गए प्रेम का मुख्य आधार क्या है?

Single Answer MCQ
Q-00037787
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Q71

मीरा की भक्ति परंपरा किससे प्रभावित थी?

Single Answer MCQ
Q-00037788
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Q72

मीरा का कौन-सा पद प्रसिद्ध है?

Single Answer MCQ
Q-00037789
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Q73

मीरा की काव्य शैली में किस तत्व का प्रमुखता से प्रयोग होता है?

Single Answer MCQ
Q-00037790
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Q74

मीरा के गीतों में कौन सा भाव विशेष रूप से विद्यमान होता है?

Single Answer MCQ
Q-00037791
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Q75

मीरा के कविताओं की भाषा किस प्रकार की होती है?

Single Answer MCQ
Q-00037792
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Q76

मीरा बाई की काव्य शैली में कौन सा प्रमुख उपकरण प्रयोग में लाया जाता है?

Single Answer MCQ
Q-00037793
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Q77

मीरा की रचनाएं किस पर आधारित होती हैं?

Single Answer MCQ
Q-00037794
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Q78

मीरा की काव्य शैली में लय का क्या महत्व है?

Single Answer MCQ
Q-00037795
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Q79

मीरा बाई के काव्य में किसका विशेष उल्लेख होता है?

Single Answer MCQ
Q-00037796
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Q80

मीरा की कविताओं में प्रकट होने वाला मुख्य उद्देश्य क्या है?

Single Answer MCQ
Q-00037797
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Q81

मीरा के लेखन में किस प्रकार का संवेदनात्मक अनुभव प्रकट होता है?

Single Answer MCQ
Q-00037798
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Q82

मीरा की कविताओं में उद्देश्य क्या है?

Single Answer MCQ
Q-00037799
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Q83

मीरा की काव्य शैली में भावनाओं का क्या प्रकार है?

Single Answer MCQ
Q-00037800
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Q84

मीरा के काव्य में छंद की विशेषता क्या होती है?

Single Answer MCQ
Q-00037801
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Q85

मीरा की कविता में शब्द चयन का क्या महत्व है?

Single Answer MCQ
Q-00037802
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Q86

मीरा की रचनाओं में किसका भाव स्पष्ट है?

Single Answer MCQ
Q-00037803
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Q87

मीरा किस भाव में अपने गीतों की रचना करती हैं?

Single Answer MCQ
Q-00037804
View explanation
Q88

मीरा की काव्य शैली में कौन सा विशेष रूपन्तरण नजर आता है?

Single Answer MCQ
Q-00037805
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Q89

खुशी और संतुष्टि किस प्रकार मिल सकती है? आप उसे पाने के लिए क्या करेंगे?

Text
Q-00201583
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Q90

पंक्ति में रेखांकित अंश के अलंकार का भेद लिखिए: गोपी पद-पंकज पावन कि रज जामे सिर भीजे।

Text
Q-00201607
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Q91

‘बालगोबिन भगत एक पद गाते।’ कर्मवाच्य में बदलकर लिखिए।

Text
Q-00202495
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Q92

अरे! आप आ गए। रेखांकित पद का पद-परिचय लिखिए।

Text
Q-00203442
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Q93

'मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती हैं' — इस कथन के पक्ष में उचित कारण है :

Single Answer MCQ
Q-00204592
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Q94

काव्यांश के आधार पर प्रभु सेवा में समर्पित मीरा मानसरोवर स्थापित करती हैं :

Single Answer MCQ
Q-00204593
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Q95

श्रीकृष्ण का सामीप्य पाने के लिए मीरा द्वारा कौन-सा कार्य नहीं किए जाने की बात कही गई?

Single Answer MCQ
Q-00204595
View explanation
Q96

श्रीकृष्ण की चाकरी में मीरा को जेब खर्च के रूप में क्या प्राप्त होगा?

Single Answer MCQ
Q-00204596
View explanation
Q97

दिए गए काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन है/हैं : (I) श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल रूप का वर्णन किया गया है। (II) मीरा ने श्रीकृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह किया है। (III) श्रीकृष्ण के सामीप्य के लिए मीरा उनकी सेविका बनने के लिए भी तैयार है। (IV) श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन किया गया है।

Single Answer MCQ
Q-00204597
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Q98

'मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती है' - इस कथन के पक्ष में उचित कारण है:

Single Answer MCQ
Q-00204658
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Q99

काव्यांश के आधार पर प्रभु सेवा में समर्पित मीरा सामंजस्य स्थापित करती हैं:

Single Answer MCQ
Q-00204659
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Q100

श्रीकृष्ण का सान्निध्य पाने के लिए मीरा द्वारा कौन-सा कार्य नहीं किए जाने की बात कही गई?

Single Answer MCQ
Q-00204661
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Q101

श्रीकृष्ण की चाकरी में मीरा को जेब खर्च के रूप में क्या प्राप्त होगा?

Single Answer MCQ
Q-00204662
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Q102

दिए गए काव्यांश के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन है/हैं: (I) श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल रूप का वर्णन किया गया है। (II) मीरा ने श्रीकृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह किया है। (III) श्रीकृष्ण के सान्निध्य के लिए मीरा उनकी सेविका बनने के लिए भी तैयार है। (IV) श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन किया गया है।

Single Answer MCQ
Q-00204663
View explanation
Q103

‘मीरा श्रीकृष्ण की चाकरी करना चाहती है’ - इस कथन के पक्ष में उचित कारण है :

Single Answer MCQ
Q-00204710
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Q104

काव्यांश के आधार पर प्रभु सेवा में समर्पित मीरा साम्राज्य स्थापित करती है :

Single Answer MCQ
Q-00204712
View explanation
Q105

श्रीकृष्ण का सामीप्य पाने के लिए मीरा द्वारा कौन-सा कार्य नहीं किए जाने की बात कही गई ?

Single Answer MCQ
Q-00204713
View explanation
Q106

श्रीकृष्ण की चाकरी में मीरा को जेब खर्च के रूप में क्या प्राप्त होगा ?

Single Answer MCQ
Q-00204714
View explanation
Q107

दिए गए काव्यांशों के मूल भाव को व्यक्त करने वाला/वाले कथन है/हैं : (I) श्रीकृष्ण के भक्तवत्सल रूप का वर्णन किया गया है। (II) मीरा ने श्रीकृष्ण से अपनी सहायता करने का आग्रह किया है। (III) श्रीकृष्ण के सान्निध्य के लिए मीरा उनकी सेविका बनने के लिए भी तैयार है। (IV) श्रीकृष्ण के रूप सौंदर्य का वर्णन किया गया है।

Single Answer MCQ
Q-00204715
View explanation
Q108

मीरा श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही है?

Single Answer MCQ
Q-00204769
View explanation
Q109

श्रीकृष्ण ने ‘नरहरि’ रूप क्यों धारण किया था?

Single Answer MCQ
Q-00204770
View explanation
Q110

काव्यांश में पौराणिक पात्रों का उल्लेख किस उद्देश्य से किया गया है?

Single Answer MCQ
Q-00204772
View explanation
Q111

काव्यांश के अनुसार श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की भक्ति में प्रधानता है:

Single Answer MCQ
Q-00204771
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Q112

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए: कथन: मीरा को पूर्ण विश्वास है कि श्रीकृष्ण उसके कष्टों का निवारण अवश्य करेंगे। कारण: वे भक्तों की पुकार सुनकर दौड़े चले आते हैं और उन्हें कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं।

Single Answer MCQ
Q-00204774
View explanation
Q113

श्रीकृष्ण ने ‘नरहरि’ रूप क्यों धारण किया था?

Single Answer MCQ
Q-00204841
View explanation
Q114

मीरा श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही है?

Single Answer MCQ
Q-00204842
View explanation
Q115

काव्यांश में पौराणिक पात्रों का उल्लेख किस उद्देश्य से किया गया है?

Single Answer MCQ
Q-00204843
View explanation
Q116

काव्यांश के अनुसार श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की भक्ति में प्रधानता है:

Single Answer MCQ
Q-00204844
View explanation
Q117

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए। कथन: मीरा को पूर्ण विश्वास है कि श्रीकृष्ण उसके कष्टों का निवारण अवश्य करेंगे। कारण: वे भक्तों की पुकार सुनकर दौड़े चले आते हैं और उन्हें कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं।

Single Answer MCQ
Q-00204845
View explanation
Q118

काव्यांश के आधार पर: श्रीकृष्ण ने ‘नरहरी’ रूप क्यों धारण किया था?

Single Answer MCQ
Q-00205029
View explanation
Q119

काव्यांश के आधार पर: मीरा श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही है?

Single Answer MCQ
Q-00205030
View explanation
Q120

काव्यांश में पौराणिक पात्रों का उल्लेख किस उद्देश्य से किया गया है?

Single Answer MCQ
Q-00205032
View explanation
Q121

निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए। कथन: मीरा को पूर्ण विश्वास है कि श्रीकृष्ण उसके कष्टों का निवारण अवश्य करेंगे। कारण: वे भक्तों की पुकार सुनकर दौड़े चले आते हैं और उन्हें कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं।

Single Answer MCQ
Q-00205033
View explanation
Q122

काव्यांश के अनुसार श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की भक्ति में प्रधानता है:

Single Answer MCQ
Q-00205038
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Q123

‘पुजारी जी की बातें सुनकर महंत जी के {{blank_1}} गए।’ — रिक्त स्थान की पूर्ति उपयुक्त मुहावरे से कीजिए।

Fill in the Blanks
Q-00205531
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मीरा – पद Practice Worksheets

Download and practice मीरा – पद worksheets to improve problem-solving accuracy and speed for CBSE Class 10 Hindi exams.

मीरा – पद - Practice Worksheet

This worksheet covers essential long-answer questions to help you build confidence in मीरा – पद from Sparsh for Class X (Hindi).

Practice

Questions

1

मीराबाई के जीवन की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए।

मीराबाई का जन्म 1503 में राजस्थान के मेड़ता शहर के पास कुड़की गाँव में हुआ था। 13 वर्ष की आयु में उनका विवाह मेवाड़ के महाराजा भोजराज के साथ हुआ। उनका जीवन दुखों की छाया में बीता। बचपन में ही उनकी माँ का देहांत हो गया था। विवाह के कुछ ही साल बाद पहले पति, फिर पिता और एक युद्ध के दौरान शालिवाहन का भी देहांत हो गया। भौतिक जीवन से निराश मीरा ने घर-परिवार त्याग दिया और वृंदावन में डेरा डालकर पूरी तरह भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन हो गईं। मीरा मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की प्रमुख कवयित्रियों में से एक हैं। उनके पद पूरे उत्तर भारत सहित गुजरात, बिहार और बंगाल तक प्रसिद्ध हैं। मीरा हिंदी और गुजराती दोनों की कवयित्री मानी जाती हैं।

2

मीराबाई के पदों की भाषा शैली पर प्रकाश डालिए।

मीराबाई के पदों की भाषा शैली में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण पाया जाता है। उनकी भाषा में पंजाबी, खड़ी बोली और पूर्वी के प्रयोग भी मिलते हैं। मीरा की भक्ति दृढ़ और माधुर्यभाव की है। उन पर योगियों, संतों और वैष्णव भक्तों का संयुक्त प्रभाव पड़ा है। मीरा के पदों की भाषा सरल, सहज और हृदयस्पर्शी है जो सीधे भक्त के हृदय तक पहुँचती है। उनके पदों में भक्ति की गहन अनुभूति और प्रेम की तीव्रता स्पष्ट देखी जा सकती है।

3

मीराबाई के पदों में भक्ति भावना किस प्रकार व्यक्त हुई है?

मीराबाई के पदों में भक्ति भावना अत्यंत गहन और प्रबल रूप से व्यक्त हुई है। उन्होंने भगवान कृष्ण को अपना सर्वस्व माना और उनके प्रति अपने प्रेम को विभिन्न रूपों में व्यक्त किया। कहीं वे कृष्ण को अपना प्रियतम मानती हैं तो कहीं उन्हें अपना सखा और रक्षक। मीरा के पदों में भक्ति की अभिव्यक्ति व्यक्तिगत प्रेम और समर्पण के रूप में हुई है। उन्होंने कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को इतना गहरा बना लिया था कि वे सांसारिक मोह-माया से पूरी तरह मुक्त हो गईं। मीरा के पदों में भक्ति की यह भावना उनके जीवन की त्रासदियों और संघर्षों के बावजूद उज्ज्वल और प्रेरणादायक है।

4

मीराबाई के पदों में प्रकृति का चित्रण किस प्रकार हुआ है?

मीराबाई के पदों में प्रकृति का चित्रण अत्यंत सजीव और मनोहारी ढंग से हुआ है। उन्होंने प्रकृति के विभिन्न रूपों को भगवान कृष्ण के प्रति अपने प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में प्रयोग किया है। मीरा ने वृक्षों, फूलों, नदियों और पहाड़ों को अपने पदों में स्थान दिया है जो उनकी भक्ति भावना को और अधिक गहराई और सुंदरता प्रदान करते हैं। प्रकृति के इन तत्वों के माध्यम से मीरा ने अपने आराध्य के प्रति अपने प्रेम और लगाव को व्यक्त किया है। उनके पदों में प्रकृति न केवल दृश्य बल्कि भावनात्मक पृष्ठभूमि भी प्रदान करती है।

5

मीराबाई के पदों की विशेषताएँ लिखिए।

मीराबाई के पदों की कई विशेषताएँ हैं जो उन्हें अन्य भक्ति कवियों से अलग करती हैं। उनके पदों में भक्ति की गहन अनुभूति, प्रेम की तीव्रता और सरल भाषा का प्रयोग मुख्य है। मीरा ने अपने पदों में भगवान कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को विभिन्न रूपों में व्यक्त किया है। उनके पदों की भाषा में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण है जो उन्हें विशिष्ट बनाता है। मीरा के पदों में व्यक्तिगत अनुभूतियों और भावनाओं की अभिव्यक्ति अत्यंत मार्मिक और हृदयस्पर्शी है। उन्होंने अपने पदों के माध्यम से सामाजिक बंधनों और रूढ़ियों को चुनौती दी है। मीरा के पद आज भी भक्ति साहित्य की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं।

6

मीराबाई के पदों में सामाजिक प्रतिबद्धता किस प्रकार दिखाई देती है?

मीराबाई के पदों में सामाजिक प्रतिबद्धता उनके जीवन और विचारों के माध्यम से स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने अपने पदों के माध्यम से सामाजिक रूढ़ियों और बंधनों को चुनौती दी है। मीरा ने जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव का विरोध किया और भक्ति के मार्ग को सभी के लिए खुला बताया। उन्होंने अपने जीवन में भी इन मूल्यों को अपनाया और समाज के विरोध के बावजूद भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन रहीं। मीरा के पदों में यह सामाजिक प्रतिबद्धता उनकी साहसिक और निर्भीक व्यक्तित्व को दर्शाती है। उन्होंने अपने पदों के माध्यम से समाज को एक नई दिशा और दृष्टि प्रदान की है।

7

मीराबाई के पदों में आध्यात्मिकता का क्या महत्व है?

मीराबाई के पदों में आध्यात्मिकता का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने अपने पदों के माध्यम से आध्यात्मिक ज्ञान और भक्ति के मार्ग को सरल और सहज ढंग से प्रस्तुत किया है। मीरा के लिए भगवान कृष्ण ही सर्वस्व थे और उन्होंने अपने पदों में इसी एकात्मभाव को व्यक्त किया है। उनके पदों में आत्मा और परमात्मा के मिलन की अभिव्यक्ति अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक है। मीरा ने अपने पदों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सच्ची आध्यात्मिकता प्रेम और समर्पण में निहित है। उनके पद आध्यात्मिक जिज्ञासुओं के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं।

8

मीराबाई के पदों में नारी विमर्श किस प्रकार प्रस्तुत हुआ है?

मीराबाई के पदों में नारी विमर्श एक महत्वपूर्ण पहलू के रूप में प्रस्तुत हुआ है। उन्होंने अपने पदों के माध्यम से नारी की स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और आध्यात्मिक अधिकारों की बात की है। मीरा ने समाज द्वारा नारी पर लगाए गए बंधनों और प्रतिबंधों को चुनौती दी है। उन्होंने अपने जीवन और साहित्य के माध्यम से यह सिद्ध किया कि नारी भी पुरुषों की तरह आध्यात्मिक उन्नति कर सकती है। मीरा के पदों में नारी की पीड़ा, संघर्ष और विजय की अभिव्यक्ति अत्यंत प्रभावशाली ढंग से हुई है। उन्होंने नारी को एक सशक्त और स्वतंत्र व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया है।

9

मीराबाई के पदों में प्रेम और भक्ति का संबंध किस प्रकार दिखाई देता है?

मीराबाई के पदों में प्रेम और भक्ति का संबंध अत्यंत गहरा और अटूट है। उन्होंने भगवान कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को भक्ति के सर्वोच्च रूप में प्रस्तुत किया है। मीरा के लिए प्रेम ही भक्ति है और भक्ति ही प्रेम। उनके पदों में प्रेम की यह भावना इतनी तीव्र और गहन है कि वह सीधे हृदय को छू लेती है। मीरा ने अपने पदों में प्रेम और भक्ति के इस संबंध को विभिन्न रूपकों और उदाहरणों के माध्यम से व्यक्त किया है। उनके पदों में प्रेम की यह अभिव्यक्ति न केवल आध्यात्मिक बल्कि मानवीय संबंधों की गहराई को भी दर्शाती है।

10

मीराबाई के पदों का समकालीन साहित्य में क्या महत्व है?

मीराबाई के पदों का समकालीन साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उनके पद न केवल भक्ति साहित्य की धरोहर हैं बल्कि आधुनिक युग में भी प्रासंगिक और प्रेरणादायक हैं। मीरा ने अपने पदों के माध्यम से जो सामाजिक, धार्मिक और आध्यात्मिक संदेश दिए हैं, वे आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उनके पदों में नारी स्वतंत्रता, सामाजिक समानता और आध्यात्मिक जागृति के विचार आधुनिक समाज के लिए मार्गदर्शक हैं। मीरा के पदों की भाषा और शैली ने समकालीन साहित्य को भी प्रभावित किया है। उनके पद आज भी लोगों के हृदय में भक्ति और प्रेम की अग्नि को प्रज्वलित करते हैं।

मीरा – पद - Mastery Worksheet

This worksheet challenges you with deeper, multi-concept long-answer questions from मीरा – पद to prepare for higher-weightage questions in Class X.

Mastery

Questions

1

मीराबाई के जीवन और उनकी कविता के माध्यम से उनकी भक्ति भावना को कैसे समझा जा सकता है?

मीराबाई का जीवन और उनकी कविता उनकी गहरी भक्ति भावना को दर्शाते हैं। उन्होंने सांसारिक सुखों को त्याग कर भगवान कृष्ण की भक्ति को अपनाया। उनकी कविताओं में कृष्ण के प्रति उनका प्रेम और समर्पण स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

2

मीराबाई के पदों में प्रयुक्त भाषा की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

मीराबाई के पदों में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती भाषाओं का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी भाषा सरल, मधुर और भावप्रधान है जो सीधे हृदय को छू लेती है।

3

मीराबाई के पदों में दिखाई देने वाले भक्ति और समर्पण के भावों की तुलना सूरदास के पदों से कीजिए।

मीराबाई और सूरदास दोनों ही भक्ति काव्य के प्रमुख कवि हैं। मीरा का भक्ति भाव अधिक व्यक्तिगत और भावुक है जबकि सूरदास का भक्ति भाव अधिक विस्तृत और दार्शनिक है।

4

मीराबाई के पदों में कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को कैसे दर्शाया गया है?

मीराबाई के पदों में कृष्ण के प्रति उनका प्रेम एक सखी के रूप में, एक प्रेमिका के रूप में और एक भक्त के रूप में देखने को मिलता है। उन्होंने कृष्ण को अपना सब कुछ माना है।

5

मीराबाई की कविताओं में सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं की कैसे अभिव्यक्ति हुई है?

मीराबाई की कविताओं में सामाजिक बंधनों को तोड़ने और धार्मिक कट्टरता के विरुद्ध एक स्पष्ट संदेश देखने को मिलता है। उन्होंने भक्ति के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक बंधनों से मुक्ति की बात की है।

6

मीराबाई के पदों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति उनके दृष्टिकोण को समझाइए।

मीराबाई के पदों में प्रकृति का वर्णन अक्सर कृष्ण के साथ जुड़ा हुआ देखने को मिलता है। उन्होंने प्रकृति को भगवान की एक अभिव्यक्ति के रूप में देखा है।

7

मीराबाई की कविताओं में नारी विमर्श के तत्वों को कैसे देखा जा सकता है?

मीराबाई की कविताओं में नारी की स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और आध्यात्मिक खोज के तत्व स्पष्ट रूप से देखने को मिलते हैं। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से नारी की शक्ति और साहस को दर्शाया है।

8

मीराबाई के पदों में आध्यात्मिक और सांसारिक प्रेम के बीच का अंतर कैसे दिखाई देता है?

मीराबाई के पदों में आध्यात्मिक प्रेम को सांसारिक प्रेम से ऊपर रखा गया है। उन्होंने कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को सांसारिक प्रेम से अलग और पवित्र बताया है।

9

मीराबाई की कविताओं में संगीत और लय की भूमिका को समझाइए।

मीराबाई की कविताएँ संगीतमय और लयबद्ध हैं। उन्होंने अपने पदों को गाकर भक्ति भावना को और अधिक गहरा और प्रभावी बनाया है।

10

मीराबाई के पदों में दिखाई देने वाले भक्ति के विभिन्न रूपों का वर्णन कीजिए।

मीराबाई के पदों में भक्ति के विभिन्न रूप जैसे दास्य भाव, सख्य भाव और माधुर्य भाव देखने को मिलते हैं। उन्होंने अपने पदों में कृष्ण के साथ अपने संबंध को इन विभिन्न भावों के माध्यम से व्यक्त किया है।

मीरा – पद - Challenge Worksheet

The final worksheet presents challenging long-answer questions that test your depth of understanding and exam-readiness for मीरा – पद in Class X.

Challenge

Questions

1

मीराबाई के जीवन में भक्ति भावना का क्या महत्व था? उनके पदों के माध्यम से इसकी व्याख्या कीजिए।

मीराबाई के जीवन में भक्ति भावना का अत्यधिक महत्व था। उन्होंने सांसारिक सुखों को त्यागकर भगवान कृष्ण की भक्ति को अपना जीवन बना लिया। उनके पदों में भक्ति की गहन भावना देखने को मिलती है, जैसे कि 'गिरिधर नागर नागरिया' में वे कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करती हैं।

2

मीराबाई के पदों में भाषा की क्या विशेषताएँ हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

मीराबाई के पदों में राजस्थानी, ब्रजभाषा और गुजराती भाषाओं का मिश्रण देखने को मिलता है। उनकी भाषा सरल yet भावपूर्ण है, जैसे कि 'म्हारो प्राण नाथ' पद में।

3

मीराबाई के पदों में कृष्ण के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति कैसे हुई है?

मीराबाई के पदों में कृष्ण के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति अत्यंत भावुक और व्यक्तिगत तरीके से हुई है। वे कृष्ण को अपने प्राणों से भी अधिक प्यारा मानती हैं, जैसे कि 'पायो जी मैंने राम रतन धन पायो' पद में।

4

मीराबाई के पदों में सामाजिक मान्यताओं की क्या भूमिका है?

मीराबाई के पदों में सामाजिक मान्यताओं की भूमिका अप्रत्यक्ष है। उन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़कर भक्ति का मार्ग चुना, जैसे कि 'मैं तो चरणन लगी' पद में।

5

मीराबाई के पदों में नारी विमर्श के कौन-कौन से पहलू देखने को मिलते हैं?

मीराबाई के पदों में नारी विमर्श के पहलू उनकी स्वतंत्र सोच और भक्ति के माध्यम से देखने को मिलते हैं। वे पुरुष प्रधान समाज में अपनी भक्ति के लिए स्वतंत्रता चाहती हैं, जैसे कि 'मैं तो प्रेम दीवानी' पद में।

6

मीराबाई के पदों में प्रकृति का क्या स्थान है?

मीराबाई के पदों में प्रकृति का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे प्रकृति के माध्यम से कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करती हैं, जैसे कि 'बरसने लगे मेघा' पद में।

7

मीराबाई के पदों में दर्शन के कौन-कौन से तत्व मिलते हैं?

मीराबाई के पदों में दर्शन के तत्व भक्ति योग और अद्वैतवाद के रूप में मिलते हैं। वे कृष्ण को सर्वोपरि मानती हैं, जैसे कि 'मैं तो चरणन लगी' पद में।

8

मीराबाई के पदों में संगीत का क्या महत्व है?

मीराबाई के पदों में संगीत का महत्व अत्यंत है। उनके पद संगीतमय हैं और भक्ति भावना को और अधिक गहरा बनाते हैं, जैसे कि 'म्हारो प्राण नाथ' पद में।

9

मीराबाई के पदों में समकालीन सामाजिक परिस्थितियों का क्या प्रभाव देखने को मिलता है?

मीराबाई के पदों में समकालीन सामाजिक परिस्थितियों का प्रभाव उनकी भक्ति और सामाजिक मान्यताओं के प्रति उनके विद्रोह के रूप में देखने को मिलता है, जैसे कि 'मैं तो प्रेम दीवानी' पद में।

10

मीराबाई के पदों में आध्यात्मिकता का क्या स्थान है?

मीराबाई के पदों में आध्यात्मिकता का स्थान केंद्रीय है। उनके पद आध्यात्मिक अनुभूतियों से भरे हुए हैं, जैसे कि 'पायो जी मैंने राम रतन धन पायो' पद में।

मीरा – पद Frequently Asked Questions

Explore the chapter on मीरा – पद from Sparsh for Class 10 Hindi. Understand मीरा's bhakti, poetry intricacies, and historical context.

मीरा का जन्म 1503 में जोधपुर के चौकड़ी गाँव (कुड़की) में हुआ माना जाता है।
मीरा का विवाह 13 वर्ष की उम्र में मेवाड़ के महाराणा सांगा के कुंवर भोजराज से हुआ था।
मीरा ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया, जैसे कि उनके पति, पिता और ससुर का निधन, जिसके बाद उन्होंने भौतिक जीवन से निराश होकर वृंदावन में कृष्ण के प्रति समर्पण किया।
मीरा के पद भक्ति भावना, दर्द और माधुर्य को दर्शाते हैं। उनकी रचनाओं में अनेक धार्मिक और आध्यात्मिक तत्त्व मिलते हैं।
मीरा के पदों की भाषा में राजस्थानी, ब्रज, गुजराती, पंजाबी और खड़ी बोली का मिश्रण पाया जाता है।
मीरा ने अपने पदों में भगवान श्री कृष्ण को निर्गुण निराकार ब्रह्म, सगुण साकार गोपीवल्लभ, और निमोही परदेशी जोगी के रूप में प्रस्तुत किया है।
मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्यभाव की होती है, जिसमें उन्होंने अद्वितीय प्रेम और समर्पण प्रकट किया है।
नहीं, मीरा की कृतियाँ हिंदी और गुजराती दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं।
मीरा संत रैदास की शिष्या थीं।
मीरा के पदों में भावुकता, माधुर्य और जीवन के विभिन्न पहलुओं का सुंदर वर्णन मिलता है।
मीरा के पदों का उल्लेख भक्ति ग्रंथों और काव्य संकलनों में मिलता है।
मीरा के जीवन में अनेक पारिवारिक संताप और दुख-दर्द समाहित थे, जिन्होंने उन्हें भक्ति की ओर अग्रसर किया।
पहले पद में मीरा ने हरि से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है, जिसमें वे द्रोपदी की लाज रखने का संदर्भ भी देती हैं।
दूसरे पद में मीरा श्री कृष्ण की चाकरी करना चाहती हैं ताकि वे नित्य उनकी सेवा कर सकें और कृष्ण के दर्शन कर सकें।
मीरा की रचनाओं की भाषा शैली सरल और गहन भावनात्मकता से भरी है, जो विभिन्न भाषाओं को एकीकृत करती है।
मीरा के पदों में भक्ति आंदोलन का गहरा प्रभाव है, जो धर्म, प्रेम और श्रद्धा की भावना को व्यक्त करता है।
हाँ, मीरा ने अपने आराध्य को कभी-कभी उलाहना भी दिया, जो उनकी जिज्ञासा और प्रेम को दर्शाता है।
मीरा के पदों को सुनना न केवल आध्यात्मिक अनुभव को गहरा करता है, बल्कि भक्ति और प्रेम की भावना को भी जागृत करता है।
हाँ, मीरा की अन्य कृतियों में भी उनकी भक्ति भावना और गहन विचारों का समावेश है।
मीरा के जीवन की प्रेरणा उनके आराध्य श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और भक्ति थी।
मीरा के पद देश भर में विशेषकर उत्तर भारत, गुजरात, बिहार और बंगाल में प्रसिद्ध हैं।
मीरा के जीवन के संघर्ष हमें धैर्य, भक्ति और प्रेम की शक्ति का पाठ पढ़ाते हैं।
मीरा के पदों का संदेश है कि सच्ची भक्ति और प्रेम व्यक्ति को सांसारिक दुखों से ऊपर उठाते हैं।
जी हाँ, मीरा की रचनाएँ आज भी प्रासंगिक हैं और भक्ति और प्रेम को निरंतर प्रोत्साहित करती हैं।

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मीरा – पद Flashcards

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These flash cards cover important concepts from मीरा – पद in Sparsh for Class 10 (Hindi).

1/19

मीरा का जन्म कब और कहाँ हुआ?

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मीरा का जन्म 1503 में जोधपुर के चौकड़ी (कुड़की) गाँव में हुआ।

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2/19

मीरा का विवाह किससे हुआ?

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मीरा का विवाह मेवाड़ के महाराणा सांगा के कुंवर भोजराज से हुआ।

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3/19

मीरा की जीवन में दिक्कतें क्या थीं?

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3/19

मीरा के जीवन में माँ, पति और पिता का निधन हुआ, जिससे वे दुखी रहीं।

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4/19

मीरा ने क्यों वृंदावन में निवास किया?

4/19

मीरा ने भौतिक जीवन से निराश होकर वृंदावन में जाकर गिरधर गोपाल कृष्ण को समर्पित किया।

5/19

मीरा का भक्ति आंदोलन में क्या स्थान है?

5/19

मीरा मध्यकालीन भक्ति आंदोलन की एक प्रमुख कवयित्री मानी जाती हैं।

6/19

मीरा की कितनी रचनाएँ उपलब्ध हैं?

6/19

मीरा की कुल सात-आठ कृतियाँ ही उपलब्ध हैं।

7/19

मीरा की भक्ति का स्वरूप क्या है?

7/19

मीरा की भक्ति दैन्य और माधुर्यभाव की है।

8/19

मीरा पर किसका प्रभाव पड़ा?

8/19

मीरा पर योगियों, संतों और वैष्णव भक्तों का सम्मिलित प्रभाव पड़ा।

9/19

मीरा के पदों की भाषा में क्या पाया जाता है?

9/19

मीरा के पदों की भाषा में राजस्थानी, ब्रज और गुजराती का मिश्रण पाया जाता है।

10/19

दूसरे पद में मीरा ने क्या कहा है?

10/19

दूसरे पद में मीरा कृष्ण से अपनी चाकरी की इच्छा व्यक्त करती हैं।

11/19

पहले पद में मीरा की हरि से प्रार्थना कैसी है?

11/19

पहले पद में मीरा हरि से अपनी पीड़ा हटाने की विनती करती हैं।

12/19

पहले पद की काव्य सौंदर्य क्या है?

12/19

पहले पद में मीरा ने कृष्ण के रूप और लाज की रक्षा का सुंदर वर्णन किया है।

13/19

मीरा कृष्ण को किस रूप में सजग करती हैं?

13/19

मीरा कृष्ण को गोपीवल्लभ, निर्गुण और निमोही रूप में दर्शाती हैं।

14/19

‘पीर’ का अर्थ क्या है?

14/19

‘पीर’ का अर्थ होता है पीड़ा या कष्ट।

15/19

मीरा ने कृष्ण के रूप का कैसा चित्रण किया है?

15/19

मीरा ने कृष्ण के रूप को सुंदर और मोहक रूप में प्रस्तुत किया है।

16/19

मीरा के पदों का प्रभाव किस पर पड़ा?

16/19

मीरा के पद पूरे उत्तर भारत में प्रचलित हैं।

17/19

मीरा की भक्ति में कौनसी भावना प्रमुख है?

17/19

मीरा की भक्ति में अनन्य प्रेम की भावना प्रमुख है।

18/19

मीरा का आध्यात्मिक संकल्प क्या है?

18/19

मीरा का आध्यात्मिक संकल्प गिरधर गोपाल की भक्ति है।

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मीरा का क्या चरित्र है?

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मीरा का चरित्र परिपूर्ण, भक्तिपूर्ण और दृढ़ विश्वास से भरा हुआ है।

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