अध्याय प्रत्यय में धातु या शब्द से जुड़ने वाले प्रत्यय का अध्ययन किया जाता है। यह भाषा की संरचना को समझने में महत्वपूर्ण है।
प्रत्यय – Formula & Equation Sheet
Essential formulas and equations from Vyakaranavithi, tailored for Class X in Sanskrit.
This one-pager compiles key formulas and equations from the प्रत्यय chapter of Vyakaranavithi. Ideal for exam prep, quick reference, and solving time-bound numerical problems accurately.
Key concepts & formulas
Essential formulas, key terms, and important concepts for quick reference and revision.
Formulas
क्त्वा प्रत्यय: धातु + क्त्वा = क्त्वान्त शब्द
Used to form indeclinables (अव्यय) indicating an action completed before another. Example: गम् + क्त्वा = गत्वा (having gone).
ल्यप् प्रत्यय: उपसर्ग + धातु + ल्यप् = ल्यपन्त शब्द
Similar to क्त्वा but used with prefixes (उपसर्ग). Example: प्र + नम् + ल्यप् = प्रणम्य (having bowed).
तुमुन् प्रत्यय: धातु + तुमुन् = तुमुनन्त शब्द
Forms infinitives indicating purpose. Example: पठ् + तुमुन् = पठितुम् (to study).
क्त प्रत्यय: धातु + क्त = क्तान्त शब्द
Forms past passive participles. Example: कृ + क्त = कृत (done).
क्तवतु प्रत्यय: धातु + क्तवतु = क्तवतुन्त शब्द
Forms past active participles. Example: गम् + क्तवतु = गतवान् (one who has gone).
तव्यत् प्रत्यय: धातु + तव्यत् = तव्यान्त शब्द
Indicates obligation or necessity. Example: पठ् + तव्यत् = पठितव्यम् (must be studied).
अनीयर् प्रत्यय: धातु + अनीयर् = अनीयान्त शब्द
Similar to तव्यत्, indicates obligation. Example: पठ् + अनीयर् = पठनीयम् (should be studied).
यत् प्रत्यय: धातु + यत् = यतान्त शब्द
Forms potential passive participles. Example: दृश् + यत् = दृश्य (visible).
ण्यत् प्रत्यय: धातु + ण्यत् = ण्यतान्त शब्द
Indicates worthiness or necessity. Example: कृ + ण्यत् = करणीय (to be done).
क्यप् प्रत्यय: धातु + क्यप् = क्यपन्त शब्द
Used with specific roots to form participles. Example: शास् + क्यप् = शिष्य (to be taught).
Equations
क्त्वा प्रत्यय: गम् + क्त्वा = गत्वा
Indicates the action of going is completed before another action. Example: गत्वा पठति (Having gone, he studies).
ल्यप् प्रत्यय: प्र + नम् + ल्यप् = प्रणम्य
Used with prefixes to indicate completed action. Example: प्रणम्य गच्छति (Having bowed, he goes).
तुमुन् प्रत्यय: पठ् + तुमुन् = पठितुम्
Forms infinitive indicating purpose. Example: पठितुम् गच्छति (He goes to study).
क्त प्रत्यय: कृ + क्त = कृत
Forms past passive participle. Example: कृतं कर्म (The done deed).
क्तवतु प्रत्यय: गम् + क्तवतु = गतवान्
Forms past active participle. Example: गतवान् छात्रः (The student who has gone).
तव्यत् प्रत्यय: पठ् + तव्यत् = पठितव्यम्
Indicates obligation. Example: पठितव्यं पुस्तकम् (The book must be read).
अनीयर् प्रत्यय: पठ् + अनीयर् = पठनीयम्
Indicates obligation. Example: पठनीयः पाठः (The lesson should be read).
यत् प्रत्यय: दृश् + यत् = दृश्यम्
Forms potential passive participle. Example: दृश्यं नाटकम् (The play is visible).
ण्यत् प्रत्यय: कृ + ण्यत् = करणीयम्
Indicates worthiness. Example: करणीयं कर्म (The deed to be done).
क्यप् प्रत्यय: शास् + क्यप् = शिष्यः
Forms participles with specific roots. Example: शिष्यः पठति (The student studies).
इस अध्याय में सन्धि के महत्व और प्रकारों का परिचय दिया गया है। यह व्याकरण की एक महत्वपूर्ण धारा है जो शब्दों के सही प्रयोग में सहायक होती है।
यह अध्याय शब्दों के रूपों का परिचय देता है और उनकी महत्ता को समझाता है। इसमें संज्ञा, सर्वनाम, और विशेषण के विभिन्न रूपों का वर्णन किया गया है।
यह अध्याय उपसर्गों का परिचय देता है और उन्हें धातु रूपों के साथ जोड़कर नए शब्दों की उत्पत्ति के महत्व को समझाता है। यह अध्ययन विद्यार्थियों के लिए आवश्यक है।
उपसर्ग अध्याय में उपसर्गों के महत्व और उनके उपयोग के बारे में जानकारी दी गई है। यह अध्ययन शब्दों के अर्थ को समझने में सहायक है।
अव्यय अध्याय में वे शब्दों का अध्ययन किया जाता है जो सव्वदा एवं वचन के आधार पर परिवर्तित नहीं होते। यह ज्ञान वाक्य निर्माण में सहायता करता है।
समास परिचय अध्याय में समास के विभिन्न प्रकारों और उनके उपयोग का वर्णन किया गया है। यह भाषा की संरचना को समझने में सहायक है।
इस अध्याय में वाक्य के कारक और विभक्तियों का अध्ययन किया गया है। यह संस्कृत व्याकरण की महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाने में सहायक है।
इस पाठ में वाच्य परिवर्तन की प्रक्रिया और उसके प्रकार समझाए गए हैं। यह अध्याय वाक्य निर्माण में सहायक है।
अस्मिन् अध्याये रचना प्रयोगस्य महत्त्वं च विषयं विवर्तते। लेखनकौशलं विकसयितुं एषः अध्यायः महत्त्वपूर्णः अस्ति।
यह अध्याय शब्दों के विभिन्न रूपों का अध्ययन करता है, जो व्याकरण की मूल बातें सिखाता है। यह ज्ञान भाषा के सही उपयोग में सहायक होता है।